इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या जैसे संगीन मामले में एफआईआर दर्ज होने के छह महीने बाद भी विवेचना अधिकारी की ओर से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) प्राप्त करने का प्रयास नहीं करने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे लापरवाही मानते हुए पुलिस अधीक्षक, पीलीभीत को संबंधित विवेचना अधिकारी के खिलाफ जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने अतुल उर्फ छोटू की जमानत अर्जी पर दिया है।
पीलीभीत के बीसलपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव ढकिया रंजीत निवासी अनामिका गंगवार ने पति की हत्या के आरोप में अतुल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दायर की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने घटना से पूर्व अनामिका व उनके पति की फोन पर हुई बातचीत की सीडीआर की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे। पिछली सुनवाई में सरकारी वकील ने स्वीकार किया था कि केस डायरी में सीडीआर मौजूद नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने विवेचना अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था।
वर्तमान सुनवाई में विवेचना अधिकारी ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि उन्होंने कोर्ट के पिछले आदेश के बाद 14 अप्रैल, 2026 को मोबाइल कंपनी को पत्र लिखकर विवरण मांगा है। कोर्ट ने इस देरी पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि विवेचना अधिकारी ने कोर्ट के हस्तक्षेप के बिना इस महत्वपूर्ण साक्ष्य को संकलित करने की जहमत नहीं उठाई। फिलहाल कोर्ट ने विवेचना अधिकारी को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 मई, 2026 के लिए तय की है।
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